50 پاسخ به “Shiv tandav stotram by Varsha dwivedi”

  1. ॥ अथ श्री-रावण- कृतम्‌ शिव- ताण्डव-स्तोत्रम्‌ ॥

    जटा-टवी-गलज्‌-जल-प्रवाह-पावित-स्थले, गलेऽव-लम्ब्य-लम्बितां-भुजङ्ग-तुङ्ग-मालिकाम्‌ ॥

    डमड्‌-डमड्‌-डमड्‌-डमन्‌-निनाद-वड्‌-डमर्वयं, चकार-चण्ड्‌-ताण्डवं-तनोतु-नः शिवः शिवम्‌ .. ।१।

    जटा-कटा-हसं-भ्रम-भ्रमन्‌-निलिम्प-निर्झरी–विलोलवी-चिवल्लरी-विराजमान-मूर्धनि .॥

    धगद्‌-धगद्‌-धगज्‌-ज्वल-ल्ललाट-पट्ट-पावके, किशोर-चन्द्र-शेखरे रतिः प्रतिक्षणं मम .. ।२।

    धरा-धरेन्द्र-नंदिनी-विलास-बन्धु-बन्धुर स्फुरद्‌-दिगन्त-सन्तति-प्रमोद-मान-मानसे .॥

    कृपा-कटाक्ष-धोरणी-निरुद्ध-दुर्धरापदि, क्वचिद्‌-दिगम्बरे-मनो विनोद-मेतु वस्तुनि .. ।३।

    जटा-भुजङ्ग-पिङ्गल-स्फुरत्‌-फणा-मणिप्रभा, कदम्ब-कुङ्कुम-द्रव-प्रलिप्त-दिग्वधूमुखे ॥

    मदान्ध-सिन्धुर-स्फुरत्त्व-गुत्तरी-यमे-दुरे मनो विनोदम्‌-अद्भुतं-बिभर्तु-भूत-भर्तरि .. ।४।

    सहस्र-लोचन-प्रभृत्य-शेष-लेख-शेखर, प्रसून-धूलि-धोरणी-विधू-सराङ्घ्रि-पीठभूः ॥

    भुजङ्ग-राज-मालया-निबद्ध-जाट-जूटक:श्रियै-चिराय-जायतां चकोर-बन्धु-शेखरः .. ।५।

    ललाट-चत्वर-ज्वलद्‌-धनञ्जय-स्फुलिङ्गभा- निपीत-पञ्च-सायकं-नमन्‌-नि-लिम्प-नायकम्‌ ॥

    सुधा-मयूख-लेखया-विराजमान-शेखरं, महा-कपालि-सम्पदे-शिरो-जटाल-मस्तूनः* .. ।६।

    (*मस्तुनः)

    कराल-भाल-पट्टिका-धगद्‌-धगद्‌-धगज्‌-ज्वलद्‌-धनञ्ज-याहुतीकृत-प्रचण्ड-पञ्च-सायके ॥

    धरा-धरेन्द्र-नन्दिनी-कुचाग्र-चित्र-पत्रक -प्रकल्प-नैक-शिल्पिनि-त्रिलोचने-रतिर्मम (?मतिर्मम) …।७।

    नवीन-मेघ-मण्डली-निरुद्ध-दुर्धर-स्फुरत्‌, कुहू-निशीथिनी-तमः प्रबन्ध-बद्ध(?बन्धु)-कन्धरः ॥

    निलिम्प-निर्झरी-धरस्‌-तनोतु (? धरस्त-नोतु ) कृत्ति-सिन्धुरः कला-निधान-बन्धुरः श्रियं जगद्‌-धुरंधरः .. ।८।

    प्रफुल्ल-नील-पङ्कज-प्रपञ्च-कालिम-प्रभा-वलम्बि-कण्ठ-कन्दली-रुचि-प्रबद्ध-कन्धरम्‌ .॥

    स्मरच्‌-छिदं, पुरच्‌-छिदं, भवच्‌-छिदं, मखच्‌-छिदं, गजच्‌-छिदां-धकछिदं, तमं-तकच्‌-छिदं भजे .. ।९।

    अखर्व(?अगर्व)-सर्व-मङ्गला-कला-कदंब-मञ्जरी, रस-प्रवाह-माधुरी विजृंभणा-मधु-व्रतम्‌ .॥

    स्मरान्तकं, पुरान्तकं, भवान्तकं, मखान्तकं-गजान्त-कान्ध-कान्तकं तमन्त-कान्तकं भजे .. ।१०।

    जयत्व-दभ्र-विभ्रम-भ्रमद्‌-भुजङ्गम्‌-अश्वसद्‌-विनिर्गमत्क्रम-स्फुरत्कराल-भाल-हव्यवाट्‌॥

    (Var:

    जयत्वदभ्र-विभ्रम-भ्रमद्‌-भुजङ्गम-स्फुरद्‌-धगद्‌-धगद्‌-विनिर्गमत्‌-कराल-भाल-हव्यवाट्‌॥ )

    धिमिद्‌-धिमिद्‌-धिमि-ध्वनन्‌-मृदङ्ग-तुङ्ग-मङ्गल-ध्वनि-क्रम-प्रवर्तित प्रचण्ड-ताण्डवः शिवः .. ।११।

    दृषद्‌-विचित्र-तल्पयोर्‌-भुजङ्ग-मौक्तिकस्रजोर्‌-गरिष्ठ-रत्न-लोष्ठयोः सुहृद्‌*-विपक्ष*-पक्षयोः .॥

    ( सुहृ-द्विपक्ष)

    तृष्णार-विन्द-चक्षुषोः प्रजामही-महेन्द्रयोःसमम्‌-प्रवृतिकः* कदा सदाशिवं भजे ..।१२।

    ( *प्रवर्त्यन्मनः )

    कदा निलिम्प-निर्झरी-निकुञ्ज-कोटरे वसन्‌, विमुक्त-दुर्मतिः सदा शिरःस्थम्‌ं-अञ्जलिं वहन्‌ .॥

    विमुक्त-लोल-लोचनो ललाम-भाल-लग्नकः, शिवेति मंत्रम्‌-उच्चरन्‌ कदा सुखी भवाम्यहम्‌ .. ।१३।

    निलिम्प नाथ-नागरी कदम्ब मौल-मल्लिका- निगुम्फ-निर्भक्षरन्म धूष्णिका-मनोहरः ।

    तनोतु नो मनोमुदं विनोदिनीं-महनिशं परिश्रय परं पदं तदंग-जत्विषां चयः ॥१४ ॥

    प्रचण्ड वाडवानल, प्रभा-शुभ-प्रचारणी, महाष्ट-सिद्धिकामिनी जनावहूत जल्पना ।

    विमुक्त वाम लोचनो विवाह-कालिक-ध्वनिः शिवेति मन्त्रभूषगो जगज्‌-जयाय जायताम्‌ ॥१५॥

    इदम्‌ (?इमं) हि नित्यमेव-मुक्त-मुक्तम्‌-उत्तमं स्तवं, -पठन्‌-स्मरन्‌-ब्रुवन्‌-नरो विशुद्धिम्‌-इति-संततम्‌ .॥

    (Var: इदम्‌ (?इमं) हि नित्यमेव-मुक्तम्‌-उक्तम्‌-उत्तमं स्तवं, -पठन्‌-स्मरन्‌-ब्रुवन्‌-नरो विशुद्धिम्‌-इति-संततम्‌ .॥

    हरे गुरौ सुभक्तिम्‌-आशु याति न्‌-अन्यथा गतिं, विमोहनं हि देहिनां तु-शङ्करस्य चिंतनम्‌ ..।१६।

    पूजा-वसान-समये दश-वक्त्र-गीतं यःशंभु-पूजन-परं पठति प्रदोषे .॥

    तस्य स्थिरां रथगजेन्द्रतुरङ्गयुक्तांलक्ष्मीं* सदैव सुमुखिं प्रददाति शंभुः .. ॥

    (*रथ-गजेन्द्र-तुरङ्ग-युक्तां-लक्ष्मीं )

    ॥ इति श्री-रावण- कृतम्‌ शिव- ताण्डव- स्तोत्रम्‌ सम्पूर्णम्‌ ॥

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    Advocate Ashok Pandey
    Lawyer
    Mumbai High Court

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